Thursday, 31 May 2018


ज धूम्रपान एवं तम्बाकूयुक्त उत्पादों के सेवन से होने वाली व्याधियों को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान पिछली शताब्दी के नौवें दशक में ही इस ओर केन्द्रित हुआ था। फलत: सन 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 31मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का निर्णय लिया। ताकि पूरे विश्व में तम्बाकू के सेवन को हतोत्साहित करने के लिए कानून बनाये जाएं और जागरूकता अभियान चलाकर इसके उपयोग को कम किया जा सके। परन्तु आज 27वर्षों बाद भी तम्बाकू के सेवन में कमी आने की बजाय बढ़ोत्तरी होना इस बात का प्रमाण है कि निषेध दिवस एक औपचारिक परम्परा मात्र बनकर रह गया है। जबकि दुनिया भर में तम्बाकू सेवन मौत का एक बड़ा कारण है, जिससे प्रति वर्ष 60लाख मौतें होती हैं और यदि इसपर नियंत्रण नहीं पाया जा सका तो सन 2030 तक प्रति वर्ष मौत का यह आंकड़ा एक करोड़ तक पहुंच सकता है।
ज्ञातव्य है कि दुनिया में डेढ़ अरब से अधिक लोग विभिन्न रूपों में तम्बाकू का सेवन करते हैं। विश्व में तम्बाकू की 65 से 85 प्रतिशत तक खपत केवल सिगरेट के रूप में होती है। एक सिगरेट में निकोटिन की इतनी मात्रा होती है कि यदि किसी व्यक्ति को उसका इंजेक्शन लगाया जाए तो उसकी मृत्यु हो सकती हैं। तम्बाकू मानव स्वास्थ्य का प्रबल शत्रु है। सिगरेट, बीड़ी, हुक्का,चिलम, सिगार, गुटखा, खैनी, पान-मसाला आदि किसी भी रूप में इसका सेवन बहुत हानिकारक है। यह लगभग 25 बीमारियों का ज्ञात कारण है, जिनमें फेफड़े, मुंह और गले या भोजन नली का कैंसर, हृदय व रक्त नलियों का रोग, फेफड़ों के रोग, गुर्दे की बीमारी, नपुंसकता, हड्डियों की बीमारी, समय पूर्व बुढ़ापा आदि शामिल हैं। सिगरेट में कैंसर पैदा करने वाले 43 तत्व और 4000 घातक रसायन होते हैं। लोग समझते हैं कि सिगरेट की तुलना में बीड़ी कम हानिकारक है, मगर यह भ्रम है। बीडी या सिगरेट में धुएं में मौजूद कॉर्बन मोनो ऑक्साइड जैसी विषैली गैस शरीर के भीतर पहुंचती है तो वहां ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। धूम्रपान रक्त की तरलता को कम कर उसे गाढ़ा बना देता है अत: रक्त में थक्के जम जाते हैं। जिससे मस्तिष्क की नस फट सकती है। सच तो यह है कि धूम्रपान अथवा किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन स्वास्थ्यप्रद नहीं है।

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